भारतीय महिला क्रिकेट टीम की युवा बल्लेबाज़ जेमिमा रोड्रिग्स इन दिनों सुर्खियों में हैं। वर्ल्ड कप 2025 के सेमीफाइनल मुकाबले में उन्होंने शानदार शतक लगाकर भारत को तीसरी बार आईसीसी महिला क्रिकेट विश्व कप के फाइनल में पहुंचा दिया है। लेकिन इस जीत के पीछे एक भावनात्मक कहानी भी छिपी है, जिसे जेमिमा ने खुद साझा किया है।
जेमिमा ने स्वीकार किया कि टूर्नामेंट की शुरुआत में वह गंभीर मानसिक दबाव और चिंता से गुजर रही थीं। उन्होंने बताया कि शुरुआती मैचों में वह बार-बार अपनी मां को फोन करतीं और रो पड़ती थीं क्योंकि उन्हें लग रहा था कि उनका आत्मविश्वास कहीं खो गया है।
उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में भावनात्मक अंदाज़ में कहा, “मैं बहुत कमजोर महसूस कर रही थी। कई बार मैच से पहले घंटों तक रोती थी। मेरी मां और पापा ने हर वक्त मेरा साथ दिया। टीम में भी अरुंधति रेड्डी, स्मृति मंधाना और राधा यादव जैसी सहेलियों ने मुझे हिम्मत दी। जब मैं मैदान पर कमजोर पड़ रही थी, तब उनका साथ मेरी सबसे बड़ी ताकत था।”
गौरतलब है कि जेमिमा को टूर्नामेंट के शुरुआती चार मैचों में कुछ खास सफलता नहीं मिली थी। उन्होंने क्रमशः 0, 32, 0 और 33 रन बनाए और फिर इंग्लैंड के खिलाफ मैच से उन्हें बाहर कर दिया गया था। उस समय टीम प्रबंधन ने एक अतिरिक्त गेंदबाज़ को शामिल किया था।
लेकिन किस्मत ने करवट बदली और उन्होंने वापसी करते हुए शानदार प्रदर्शन किया। न्यूजीलैंड के खिलाफ अर्धशतक और फिर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 134 गेंदों पर नाबाद 127 रन की पारी खेलते हुए भारत को महिला वनडे क्रिकेट इतिहास में सबसे बड़े लक्ष्य (339 रन) का पीछा कर जीत दिलाई।
मैच के बाद जब जेमिमा ने ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ सोफी मोलिन्यू की गेंद पर विजयी शॉट लगाया, तो उनके चेहरे पर खुशी के साथ राहत के भी भाव थे। उन्होंने कहा, “जब आप बुरे दौर से गुजरते हैं, तो बस ज़रूरी होता है थोड़ा रुकना, खुद पर भरोसा रखना और सही लोगों के साथ रहना। मुझे बहुत लोगों का साथ मिला, जब मैं खुद पर भरोसा नहीं कर पा रही थी।”
बता दें कि इस ऐतिहासिक जीत के बाद भारतीय टीम अब फाइनल मुकाबले में पहली बार फाइनल में पहुंची दक्षिण अफ्रीका टीम से भिड़ेगी। रविवार को होने वाला यह मुकाबला न केवल नए विश्व चैंपियन को तय करेगा, बल्कि भारतीय महिला क्रिकेट इतिहास के एक और सुनहरे अध्याय की शुरुआत भी करेगा।

