ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट का नजरीया खेल को लेकर हमेशा से सीधा लेकिन बेहद आक्रामक रहा है। मैदान पर इस अंदाज़ में खेलो कि हार विकल्प ही न लगे। दिलचस्प यह है कि आबादी भारत के एक मेट्रो शहर से भी कम होते हुए भी ऑस्ट्रेलिया दुनिया की सबसे सफल क्रिकेट तरीका बन चुका है।
भारतीय टीम फिलहाल ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर है, जहां तीन वनडे और पांच टी-20 मैच खेले जाएंगे। क्रिकेट एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह सिर्फ सीरीज़ नहीं, बल्कि दो बिल्कुल अलग खेल-संस्कृतियों की टक्कर है।
गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलिया पुरुष अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अब तक 1100 से अधिक जीत दर्ज करने वाली दुनिया की अकेली टीम है। वहीं महिला क्रिकेट में वे हर हार पर लगभग तीन जीत की दर से आगे चलते हैं। इस दबदबे के पीछे तीन मुख्य कारण माने जाते हैं, जीत को आदत बना चुकी मानसिकता, स्कॉलरशिप और स्टेडियम-ड्रिवन स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर।
21वीं सदी में भारत ने सबसे अधिक मुकाबले जीते हैं, यहां तक कि ऑस्ट्रेलिया से भी अधिक, लेकिन जब बात आती है ICC ट्रॉफी की, तो ऑस्ट्रेलिया भारत से 8 खिताब आगे है और फाइनल की भिड़ंत में भारत एक भी बार उन्हें हरा नहीं पाया है।
सबसे बड़ा फर्क भावनाओं का माना जाता है। 2023 में फाइनल जीतकर लौटी ऑस्ट्रेलियाई टीम के स्वागत में एयरपोर्ट पर बस कुछ लोग खड़े थे, जबकि भारत ने 2024 का टी-20 वर्ल्ड कप जीता, तो सड़कों पर लाखों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। यही प्रोफेशनल बनाम भावनात्मक दृष्टिकोण का मूल अंतर है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर टीम इंडिया और भारतीय समर्थक मैच को उत्सव नहीं, मिशन की तरह देखना शुरू करें, तो ऑस्ट्रेलिया को लगातार टक्कर देने की क्षमता बहुत अधिक बढ़ सकती है, लेकिन अभी की स्थिति यही बताती है कि मानसिक स्थिरता और अनुशासन के खेल में बढ़त अभी भी ऑस्ट्रेलिया के पास है।

