4 जून को बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर हुई भगदड़ के लिए केंद्रीय प्रशासनिक न्यायधिकरण (CAT) ने आरसीबी प्रबंधन को जिम्मेदार माना है। CAT ने कहा है कि, आरसीबी प्रबंधन ने बिना पुलिस की अनुमति के सोशल मीडिया पर अचानक विजय जुलूस की घोषणा कर दी जिससे लाखों की भीड़ जमा हो गई और उसमें भगदड़ मच गई। बता दें कि, इस भगदड़ में 11 लोगों की जान चली गई जबकि 55 से ज्यादा लोग घायल हुए।
CAT की बेंगलुरु पीठ के जस्टिस बीके श्रीवास्तव और प्रशासनिक सदस्य संतोष मेहरा ने आदेश में कहा कि, प्रथम दृष्टया ऐसी प्रतीत होती है कि आरसीबी लगभग 3 से 5 लाख लोगों की भीड़ के लिए जिम्मेदार है। आरसीबी ने राज्य की पुलिस से आवश्यक अनुमति या सहमति नहीं ली। उसने अपनी आईपीएल 2025 की जीत का जश्न मनाने के लिए अचानक सोशल मीडिया पर जानकारी पोस्ट की और उसी के परिणामस्वरूप लोगों की भीड़ जमा हो गई।
साथ ही CAT ने कहा कि, समय की कमी के कारण,पुलिस उचित व्यवस्थान करने में असमर्थ थी। पुलिस से ये उम्मीद नहीं की जा सकती है कि लगभग 12 घंटे के छोटे समय में वह सभी आवश्यक व्यवस्थाएं कर लेगी। CAT ने आगे कहा कि, पुलिसकर्मी भी इंसान ही हैं। वे न तो भगवान हैं और न ही कोई जादूगर हैं। उनके पास अल्लादीन के चिराग जैसी कोई जादुई शक्तियां नहीं है कि वे उंगली रगड़कर कोई भी इच्छा पूरी कर सकें।
CAT ने ये टिप्पणी ने भारतीय पुलिस अधिकारी विकास कुमार द्वारा अपने निलंबन को रद्द करने के लिए दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए की। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायधिकरण ने आईपीएस विकास कुमार को राहत देते हुए उनका निलंबन भी रद्द कर दिया और निलंबन अवधि के समय को भई सेवा का हिस्सा मानने के आदेश दिए हैं।
साथ ही केंद्रीय प्रशासनिक न्यायधिकरण ने विकास कुमार की बहाली का आदेश देने के साथ ही सरकार को मामले में निलंबित किए गए अन्य पुलिस अधिकारी तत्कालीन पुलिस आयुक्त बी दयानंद और उपायुक्त शेखर एच टेक्कण्णावर की बहाली पर पुनर्विचार करने का भी सुझाव दिया है।