साल 2022 में बेलफास्ट में जब जोनाथन ट्रॉट ने अफगानिस्तान पुरुष क्रिकेट टीम के मुख्य कोच के रूप में कार्यभार संभाला, तब परिस्थितियां आसान नहीं थीं। मौजूद जानकारी के अनुसार वह अपनी यात्रा का खर्च स्वयं वहन कर आयरलैंड पहुंचे थे और शुरुआती दिनों में उनके पास आधिकारिक किट तक उपलब्ध नहीं थी। उस समय शायद ही किसी ने अनुमान लगाया होगा कि यह नियुक्ति अफगान क्रिकेट के लिए परिवर्तनकारी साबित होगी।
बताते चलें कि ट्रॉट को यह जिम्मेदारी अप्रत्याशित रूप से मिली। यह पद पहले उनके मेंटर ग्राहम थोर्पे को प्रस्तावित किया गया था, लेकिन निजी कारणों से उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया। इसके बाद अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने ट्रॉट पर भरोसा जताया। उस समय टीम के पास स्वाभाविक प्रतिभा तो भरपूर थी, लेकिन पेशेवर संरचना, योजना और अनुशासन की स्पष्ट प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता थी।
गौरतलब है कि ट्रॉट ने कार्यभार संभालते ही बुनियादी ढांचे और पेशेवर संस्कृति पर ध्यान केंद्रित किया। समय पालन, अभ्यास सत्रों की नियमितता, फिटनेस मानक और मैच पूर्व तैयारी को संस्थागत रूप दिया गया। सांस्कृतिक समन्वय भी उनके लिए महत्वपूर्ण पहलू रहा। अभ्यास कार्यक्रम और नमाज के समय के बीच संतुलन स्थापित करने जैसे विषयों पर संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाया गया, जिससे टीम के भीतर विश्वास और सम्मान का वातावरण बना।
अफगान खिलाड़ियों की सामाजिक पृष्ठभूमि ने भी कोचिंग प्रक्रिया को प्रभावित किया। कई खिलाड़ी संघर्षपूर्ण परिस्थितियों में पले-बढ़े थे। भाषा और शिक्षा संबंधी चुनौतियां सामने आईं। टीम मूल्यों और रणनीतिक दस्तावेजों को सभी खिलाड़ियों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए संवाद की शैली में बदलाव करना पड़ा। ट्रॉट ने तकनीकी निर्देशों के साथ-साथ व्यवहारिक और प्रेरणात्मक संवाद को अहमियत दी।
मैदान पर रणनीतिक बदलाव स्पष्ट दिखाई दिए। रन रोटेशन, दबाव की स्थिति में संयम और फील्डिंग मानकों में सुधार पर विशेष जोर दिया गया। ट्रॉट का मानना रहा कि सीमित ओवरों के क्रिकेट में केवल बड़े शॉट निर्णायक नहीं होते, बल्कि सिंगल और डबल के माध्यम से पारी को स्थिर रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
इस दौरान अजमतुल्लाह ओमरजई जैसे कई युवा खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उभरे। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर निरंतर प्रदर्शन कर पहचान बनाई और प्रमुख टी20 लीगों में अवसर हासिल किए। इसे विशेषज्ञ अफगान क्रिकेट की संरचनात्मक प्रगति का संकेत मानते हैं।
ट्रॉट के कार्यकाल में टीम ने वैश्विक प्रतियोगिताओं में भी प्रभाव छोड़ा। 2023 टी20 विश्व कप में अफगानिस्तान सेमीफाइनल की दौड़ में अंतिम चरण तक प्रतिस्पर्धी बना रहा, जबकि 2024 टी20 विश्व कप में टीम नॉकआउट चरण तक पहुंची। हालांकि 2026 संस्करण में उस प्रदर्शन को दोहरा सकी।
अब ट्रॉट का कार्यकाल समाप्ति की ओर है। सूत्रों के अनुसार बोर्ड की रणनीतिक प्राथमिकताओं में बदलाव और अफगानिस्तान में अधिक समय बिताने से जुड़ी अपेक्षाओं ने इस निर्णय को प्रभावित किया। ट्रॉट ने संकेत दिया कि टीम के विकास के इस चरण पर नेतृत्व परिवर्तन स्वाभाविक प्रक्रिया का हिस्सा है।
उन्होंने विशेष रूप से राशिद खान की पेशेवर प्रतिबद्धता की सराहना की और कहा कि वरिष्ठ खिलाड़ियों की अनुशासनात्मक दृष्टि ने टीम संस्कृति को सुदृढ़ किया। विदाई के समय ट्रॉट भावुक अवश्य दिखे, लेकिन संतोष भी व्यक्त किया कि सीमित संसाधनों के बावजूद टीम ने वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धी पहचान बनाई।

