एक बार फिर दक्षिण अफ्रीका की टीम वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में खड़ी है। बता दें कि आईसीसी के सीमित ओवरों के वर्ल्ड कप में यह नौवां मौका है जब टीम अंतिम चार में पहुंची है। हालांकि गौरतलब है कि इतने मौकों के बावजूद ट्रॉफी अब तक हाथ नहीं लगी है।
मौजूद जानकारी के अनुसार पिछली टी20 वर्ल्ड कप में टीम पहली बार फाइनल में पहुंची थी, लेकिन खिताबी मुकाबले में भारत से हार झेलनी पड़ी थी। बड़े टूर्नामेंट के नॉकआउट मुकाबलों में दबाव झेलने में नाकामी को लेकर टीम पर ‘चोकर्स’ का टैग भी लगाया जाता रहा है।
हाल ही में जिम्बाब्वे के खिलाफ सुपर-8 में पांच विकेट से जीत के बाद जब मुख्य कोच शुक्री कॉनराड से इस टैग को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने इसे सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने मजाकिया अंदाज में आधिकारिक ब्रॉडकास्टर के एक विज्ञापन पर भी टिप्पणी की, जिसमें कपकेक के जरिए टीम पर तंज कसा गया था। बाद में वह विज्ञापन हटा लिया गया था।
कोनराड का कहना है कि उनकी टीम अब दबाव में टूटने के बजाय हालात को संभालना जानती है। उन्होंने कहा कि अच्छी टीम वही होती है जो मुश्किल समय में भी नतीजा अपने पक्ष में निकाल ले। टूर्नामेंट में दक्षिण अफ्रीका ने यह साबित भी किया है। भारत, न्यूजीलैंड और वेस्टइंडीज जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ उसने प्रभावी जीत दर्ज की, वहीं अफगानिस्तान को सुपर ओवर में हराया और जिम्बाब्वे के खिलाफ भी संघर्षपूर्ण मुकाबले में बाजी मारी।
गौरतलब है कि बल्लेबाजों के साथ-साथ तेज गेंदबाजों ने भारतीय पिचों पर खास प्रभाव छोड़ा है। कोच ने साफ कहा कि दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेट की पहचान हमेशा तेज गेंदबाज रहे हैं, जो 145 किमी प्रति घंटे से ज्यादा रफ्तार से गेंदबाजी कर सकते हैं। भारतीय परिस्थितियों में सटीक यॉर्कर, बदलाव और अतिरिक्त गति ने टीम को बढ़त दिलाई है।
बता दें कि पिछले साल टीम ने वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का खिताब जीतकर आईसीसी टूर्नामेंट में लंबा सूखा जरूर खत्म किया था, लेकिन सफेद गेंद के वर्ल्ड कप में ट्रॉफी जीतना अब भी बड़ा लक्ष्य बना हुआ है।
अब दक्षिण अफ्रीका टूर्नामेंट की इकलौती अजेय टीम के रूप में सेमीफाइनल में उतरने जा रही है, जहां उसका सामना न्यूजीलैंड से कोलकाता में होगा। मौजूदा फॉर्म और संतुलित प्रदर्शन को देखते हुए टीम खिताब की प्रबल दावेदार मानी जा रही है और यह टूर्नामेंट उनके लिए इतिहास बदलने का सुनहरा मौका साबित हो सकता है

