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Virat Kohli के टेस्ट संन्यास पर मनोज तिवारी का बड़ा दावा, बयान से बढ़ी बहस

विराट कोहली के टेस्ट क्रिकेट से विदा लेने का मुद्दा अभी भी थमा नहीं है। इस बहस में अब पूर्व भारतीय बल्लेबाज़ मनोज तिवारी की एंट्री हुई है, जिन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान कोहली के फैसले को लेकर बड़ा और विवादित दावा किया है।
बता दें कि मनोज तिवारी ने एक बातचीत में कहा है कि विराट कोहली ने टेस्ट क्रिकेट खुद की मर्जी से नहीं छोड़ा, बल्कि परिस्थितियां ऐसी बना दी गई थीं कि उन्हें यह फैसला लेना पड़ा है। तिवारी का मानना है कि कोहली उस तरह के खिलाड़ी नहीं रहे हैं, जो अचानक सबसे चुनौतीपूर्ण फॉर्मेट से संन्यास लेने का फैसला कर लें। उन्होंने कहा कि निर्णय भले ही कोहली ने सार्वजनिक रूप से खुद लिया हो, लेकिन इसके पीछे की कहानी क्रिकेट जगत में कई लोगों को पता है।
गौरतलब है कि यह बयान उस टिप्पणी के संदर्भ में आया है, जिसमें संजय मांजरेकर ने कहा था कि विराट कोहली ने खेल के सबसे कठिन फॉर्मेट टेस्ट को छोड़कर अपेक्षाकृत आसान फॉर्मेट में खेलना चुना है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए तिवारी ने इस तर्क से असहमति जताई है और कहा है कि सभी परिस्थितियों को जाने बिना इस तरह का निष्कर्ष निकालना सही नहीं है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, विराट कोहली का टेस्ट करियर भारतीय क्रिकेट के एक पूरे दौर का प्रतिनिधित्व करता है। रन बनाने से लेकर कप्तानी तक, उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में भारत की पहचान को आक्रामक और प्रतिस्पर्धी बनाया है। जो रूट और स्टीव स्मिथ जैसे समकालीन खिलाड़ी अब भी टेस्ट में बड़े शतक लगा रहे हैं, ऐसे में कोहली की गैरमौजूदगी लगातार महसूस की जा रही है।
यह भी गौरतलब है कि कोहली के टेस्ट से हटने के बाद भारतीय टेस्ट टीम एक संक्रमण के दौर से गुजर रही है। नए बल्लेबाज़ों को जिम्मेदारी मिल रही है और तुलना स्वाभाविक रूप से पुराने कोर समूह से की जा रही है। ऐसे माहौल में, पूर्व खिलाड़ियों की हर टिप्पणी चर्चा का विषय बन जाती है।
मनोज तिवारी के बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ है और इसने एक बार फिर बहस को तेज कर दिया है। कई पूर्व क्रिकेटरों ने इस फैसले को लेकर अलग-अलग मंचों पर अपनी राय रखी है। बातचीत कभी मैदान के प्रदर्शन पर जाती है, तो कभी पर्दे के पीछे की बातों पर टिक जाती है।
विराट कोहली की ओर से, उनके टेस्ट संन्यास को लेकर अब तक कोई नया सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में हर नई प्रतिक्रिया अपने आप में एक अलग खबर बन रही है। फिलहाल, यह चर्चा भारतीय क्रिकेट के भीतर और बाहर दोनों जगह जारी है और जब-जब टेस्ट क्रिकेट सुर्खियों में आता है, यह बहस फिर से सामने आ जाती है।
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