विमेंस प्रीमियर लीग के मेगा ऑक्शन में इस बार माहौल काफी दिलचस्प रहा। साढ़े पांच घंटे चली नीलामी में एक-एक खिलाड़ी पर फ्रेंचाइजियों की रणनीतियां साफ नजर आईं। मौजूद जानकारी के अनुसार 128 खिलाड़ियों का नाम आया था, लेकिन केवल 67 खिलाड़ियों की खरीद हुई, जिन पर कुल 40.80 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। बता दें कि इसमें 23 विदेशी और 44 भारतीय खिलाड़ियों को टीमों ने अपने स्क्वॉड का हिस्सा बनाया है।
गौरतलब है कि 2 बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस ने शुरुआत से ही अपनी पिछली कोर टीम को वापस लाने पर पूरा ध्यान रखा। नतीजतन अमीलिया केर और शबनिम इस्माइल जैसी प्रमुख प्लेयर्स एक बार फिर टीम के साथ जुड़ गईं। हरमनप्रीत कौर की अगुवाई में टीम का बैटिंग और ऑलराउंडर विभाग पहले से भी ज्यादा मजबूत दिखाई दे रहा है, हालांकि युवा विकेटकीपर जी कमलिनी को प्लेइंग-11 में फिट करना चुनौती बन सकता है।
उधर दिल्ली कैपिटल्स के लिए दिन मिला-जुला रहा। टीम मेग लैनिंग को रिलीज करने के बाद उन्हें वापस नहीं खरीद सकी और लैनिंग को यूपी वॉरियर्ज ने 1.90 करोड़ रुपए में अपने साथ जोड़ लिया। दिल्ली ने स्नेह राणा, लौरा वोल्वार्ट और शिनेले हेनरी जैसे नामों के साथ बैटिंग लाइनअप को मजबूत जरूर किया है, लेकिन विकेटकीपिंग स्लॉट पर अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है। तानिया भाटिया का विकल्प सीमित होने के कारण टीम को संयोजन में बदलाव पर अधिक सोचना पड़ेगा।
RCB की बात करें तो टीम ने अपने ऑलराउंडर्स पर भरोसा बरकरार रखा है। स्मृति मंधाना के साथ जॉर्जिया वोल, एलिस पेरी और ऋचा घोष जैसे प्लेयर्स किसी भी मैच का रुख बदलने का दम रखते हैं। हालांकि, गेंदबाजी विभाग में अनुभव की कमी उन्हें दबाव वाली स्थितियों में मुश्किल में डाल सकती है। नदीन डी क्लर्क और राधा यादव की मौजूदगी के बावजूद विकेट लेने वाली गेंदबाजों की कमी महसूस होने की संभावना बनी हुई है।
यूपी वॉरियर्ज ने इस बार ऑक्शन में सबसे दमदार कदम उठाए। बड़े पर्स का फायदा लेते हुए टीम ने मेग लैनिंग, डिएंड्रा डॉटिन, फीबी लिचफील्ड और सोफी एकलस्टन जैसी शीर्ष खिलाड़ियों को स्क्वॉड में शामिल किया। टीम का टॉप ऑर्डर और बॉलिंग डिपार्टमेंट दोनों ही बेहद संतुलित नजर आ रहे हैं। मौजूद जानकारी के अनुसार टीम ने विकेटकीपर स्लॉट पर अनकैप्ड क्षिप्रा गिरी पर भरोसा जताया है, जो सीजन के दौरान एक बड़ा फैक्टर साबित हो सकती हैं।
गुजरात जायंट्स ने इस बार बल्लेबाजी को मजबूती देने पर जोर दिया है। सोफी डिवाइन, यास्तिका भाटिया और बेथ मूनी जैसी बल्लेबाज टीम को मजबूत शुरुआत दे सकती हैं। हालांकि गेंदबाजी विभाग में अनुभव की कमी उनकी सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभर सकती है। काश्वी गौतम, तितास साधु और तनुजा कंवर जैसी युवा गेंदबाज बड़े मैच के दबाव में स्थिरता बनाए रखने में संघर्ष कर सकती हैं।
कुल मिलाकर इस ऑक्शन ने हर टीम की रणनीति और आने वाले सीजन की तस्वीर कुछ हद तक साफ कर दी है। कुछ फ्रेंचाइजियां अपने पुराने कॉम्बिनेशन को फिर से मजबूत कर मैदान में उतरेंगी, जबकि कुछ टीमों ने बड़े बदलावों के साथ नई शुरुआत करने का फैसला लिया है। खिलाड़ियों की भूमिकाओं और संयोजन को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि आने वाला सीजन पहले से ज्यादा रोमांचक और प्रतिस्पर्धी होने वाला है, जिसकी तैयारियां सभी टीमों ने शुरू कर दी हैं।

