रांची में खेले गए पहले वनडे में विराट कोहली ने एक बार फिर दिखा दिया कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनकी निरंतरता और शैली क्यों अद्वितीय मानी जाती है। मौजूद जानकारी के अनुसार इस मैच में कोहली ने धैर्य, क्लास और मैच की ज़रूरत के मुताबिक स्ट्रोक चयन का बेहतरीन संतुलन दिखाया। बता दें कि उन्होंने अपने करियर का 52वां वनडे शतक लगाया है, और इसी के साथ वह एक ऐसे मुकाम पर पहुंच गए हैं, जहां अब तक केवल सचिन तेंदुलकर का ही नाम था।
गौरतलब है कि कोहली अब किसी एक अंतरराष्ट्रीय फॉर्मेट में 51 से अधिक शतक बनाने वाले दुनिया के पहले क्रिकेटर बन गए हैं। यह उपलब्धि पुरुष अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के 7000वें शतक के रूप में भी दर्ज हुई है। यह वह रिकॉर्ड है जो बीते दो दशकों तक किसी ने चुनौती देने की हिम्मत भी नहीं की थी।
भारत की पारी की शुरुआत रोहित शर्मा ने तेज़ अर्धशतक से की थी। रोहित 57 रन बनाकर आउट हुए, लेकिन कोहली ने एक छोर संभाले रखा और पारी को स्थिरता दी। जैसे ही उन्होंने क्रीज पर जमना शुरू किया, रोहित के साथ उनकी साझेदारी लय पकड़ने लगी। दोनों ने मिलकर 136 रन की साझेदारी की, जिसने भारत को मजबूत शुरुआत को बड़े स्कोर की ओर मोड़ा है।
ऐतिहासिक क्षण 38वें ओवर में आया। मार्को जानसन की ऑफ स्टंप के बाहर उठती हुई गेंद को कोहली ने बेहद नफ़ासत से थर्ड मैन की दिशा में ओपन फेस शॉट के जरिए चौके में बदल दिया। मैदान में मौजूद दर्शक उसी क्षण समझ गए थे कि इतिहास बन चुका है। कोहली ने हल्के उछाल और हवा में घूंसा मारकर इस उपलब्धि का जश्न मनाया, जबकि रांची के दर्शकों ने खड़े होकर उनका स्वागत किया।
हालांकि शतक के बाद भी उनकी पारी थमी नहीं। वह 135 रन बनाकर आउट हुए, जब उन्होंने कवर के ऊपर से एक बड़ा शॉट खेलने की कोशिश की और रिकेटन ने पीछे भागते हुए शानदार कैच पकड़ लिया। मैदान छोड़ते समय कोहली ने चारों ओर हाथ उठाकर दर्शकों का अभिवादन स्वीकार किया, और पूरे स्टेडियम ने उन्हें स्टैंडिंग ओवेशन दिया है।
कोहली ने इस मैच के जरिए न केवल एक नया रिकॉर्ड बनाया, बल्कि यह भी साबित किया कि शीर्ष स्तर का अंतरराष्ट्रीय खेल समर्पण, मानसिक मजबूती और कौशल का संगम होता है। उनका यह शतक भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक नए अध्याय की तरह दर्ज हो चुका है।

