दिल्ली हाई कोर्ट ने गौतम गंभीर फाउंडेशन और उसके सदस्यों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया है। बता दें कि, गंभीर के इस फाउंडेशन में उनके अलावा उनकी पत्नी और मा सीमा गंभीर शामिल हैं। दरअसल, मामला कोरोना महामारी के दौरान 21 में बैगर लाइसेंस के दवा बांटने से जुड़ा है।
सितंबर 2021 में हाईकोर्ट ने दिल्ली के औषधि नियंत्रण विभाग द्वारा गौतम गंभीर फाउंडेशन के खिलाफ रोहिणी कोर्ट में दायर एक आपराधिक शिकायत की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। औषधि एंव प्रसाधन सामग्री अधिनियम के तहत दायर इस शिकायत में दिल्ली में महामारी की दूसरी लहर के दौरान फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक मेडिकल कैंप के दौरान कोविड दवा के अनधिकृत भंडारण और वितरण का आरोप लगाया गया था।
शिकायत में जीजीएफ के ट्रस्टी तत्कालीन भाजपा सांसद गौतम गंभीर, उनकी पत्नी नताशा गंभीर, उनकी मां सीमा गंभीर और सीईओ अपराजिता सिंह को भी आरोपी बनाया गया था। औषधि नियंत्रण विभाग ने आरोप लगाया था कि जीजीएफ के पास मेडिकल ऑक्सीजन सहित दवाओं के भंडारण या वितरण का लाइसेंस नहीं था। इससे औषधि एंव प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 और नियमों के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ।
वहीं आरोपी के वकील ने इस साल स्थगन की मांग की थी। 9 अप्रैल को एक आदेश में न्यायमूर्ति नीना बंसल कृ्ष्णा ने अंतरिम रोक हटा दी थी और मामले को आगे की बहस के लिए 26 नवंबर को उच्च न्यायालय के समक्ष सूचीबद्ध किया था। सोमवार को रोक को बहाल करने की मांग करते हुए फाउंडेशन और उसके ट्रस्टियों के वकील जय अनंत देहाद्राय ने बताया कि ट्रायल कोर्ट के समक्ष अगली तारीख अब 8 सितंबर है। उन्होंने अनुरोध किया कि आरोपियों को तब तक संरक्षण दिया जाए जब तक कि हाईकोर्ट नवंबर में मामले की अगली सुनवाई नहीं कर लेता।